आधुनिक युग के आरम्भ में फ्रांसीसी क्रांति (१७८९) के उन्नायकों ने ‘स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व’ का नारा बुलंद किया था। भारतीय संविधान की प्रस्तावना (१९५०) के अंतर्गत भी उपरोक्त लक्ष्यों के साथ ही ‘व्यक्ति की गरिमा’ और ‘राष्ट्र की एकता और अखंडता’ को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
राजनीति विज्ञान : महत्वपूर्ण तथ्य (भाग- 4)
अफ्रीका के प्रसिद्ध नव मार्क्स वादी समीर अमीन ने अपनी पुस्तक ‘ एक्युमुलेशन ऑन ए वर्ल्ड स्केल’ (१९७४) और ‘ अनईक्वल डिवलेपमेंट’ (१९७६) के अंतर्गत लिखा कि आज के युग में औद्योगीकृत देश और अत्यल्प विकसित देश आपस में इस ढंग से जुड़ गए हैं कि पूंजीवाद अल्प विकसित देशों में उत्पादन शक्तियों के विकास की अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभाने में असमर्थ हो गया है।
राजनीति विज्ञान : महत्वपूर्ण तथ्य (भाग- 3)
वर्ष १९५४ में उसी अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ‘ब्राउन बनाम टोपैका’ के मामले में अपने पुराने निर्णय को रद्द करते हुए यह व्यवस्था दी कि यदि श्वेत और अश्वेत जातियों को समान सुविधाएं तो उपलब्ध हों परन्तु उन्हें मिलजुल कर उनका उपयोग करने से रोक दिया जाए तो कानून की दृष्टि से उसकी समानता निरर्थक हो जाती है।
राजनीति विज्ञान : महत्वपूर्ण तथ्य (भाग-२)
सोवियत संघ में वर्ष १९८५ से मिखाइल गोर्वाचेव ने ‘पेरेस्रोइका’ ( पुनर्गठन) और ‘ग्लासनास्त’ (खुलेपन) की जिस नीति की शुरुआत की, उसने सूचना के स्वतंत्र प्रवाह, सामाजिक और राजनीतिक वाद- विवाद, अर्थव्यवस्था के विकेन्द्रीयकरण और विदेश नीति पर पुनर्विचार को बढ़ावा दिया।
राजनीति विज्ञान : महत्वपूर्ण तथ्य (भाग- 1)
फ्रांसिस बेकन (१५६१-१६२६) एक ब्रिटिश दार्शनिक था, जिसका मानना था कि विज्ञान की उन्नति से ही समाज की उन्नति हो सकती है। अपनी योजना को कार्यरूप देने के लिए बेकन ने ‘‘विज्ञान की प्रबुद्ध तानाशाही’’ की संस्तुति की है।
श्री स्वामी प्रसाद मौर्य : इंसानियत की आवाज़
– डॉ. राजबहादुर मौर्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, बुंदेलखंड कालेज झांसी। फोटो गैलरी- डॉ. संकेत सौरभ, झांसी, उत्तर प्रदेश, भारत। email: drrajbahadurmourya @ gmail. Com, website : themahamaya.com उत्तर…
एक युग का अंत : श्री गिरिजा शंकर मौर्य का परिनिर्वाण
गांव सुट्ठा हरदो के मूल निवासी श्री गिरिजा शंकर मौर्य के दिनांक १३ दिसम्बर, २०२१ के परिनिर्वाण से एक युग का अंत हो गया। एक आवाज, जिसमें सामाजिक परिवर्तन की गूंज थी, एक साहस, जिसमें जुर्म, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ बोलने का जज्बा था, एक साहित्य और संगीत का प्रेमी…
उत्तर-प्रदेश का श्रम विभाग बना मजदूर भाइयों के परिवार का सहारा
श्रम मंत्रालय के बहुत ही कर्मठ, बिना थके लगातार कठिन साधना करने वाले यशस्वी कैबिनेट मंत्री श्री स्वामी प्रसाद मौर्य का सबसे अधिक सराहनीय योगदान है। श्रम विभाग द्वारा सरकारी खर्च पर श्रमिक परिवारों की बेटियों का पूरे सम्मान के साथ वैवाहिक संस्कार हो, यह स्वामी प्रसाद मौर्य का विजन और मिशन है।
बुंदेलखंड में जनता पार्टी
– डॉ. राज बहादुर मौर्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, बुंदेलखंड कालेज, झांसी परिचय- वर्ष १९७५ में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा लाए गए आपातकाल के दौरान ही…
बुन्देलखण्ड में वामपंथी राजनीति
– डॉ. राजबहादुर मौर्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, बुंदेलखंड कालेज, झांसी (उ. प्र.) परिचय- भारत में वामपंथी राजनीति से आशय कार्ल मार्क्स और उसकी विचारधारा से प्रेरित राजनीतिक दलों…
बुन्देलखण्ड में भारतीय क्रांति दल
भारतीय क्रांति दल- परिचय सन् १९६७ में राजस्थान के दिग्गज किसान नेता चौधरी कुम्भाराम आर्य (१० मई १९१४-२६ अक्टूबर १९९५) तथा उत्तर प्रदेश के किसान नेता चौधरी चरण सिंह (२३…
बुंदेलखंड में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (प्र.सो.पा.)
– डॉ. राजबहादुर मौर्य, असिस्टेंट प्रोफेसर राजनीति विज्ञान, बुंदेलखंड महाविद्यालय झांसी (उत्तर प्रदेश) प्रजा सोशलिस्ट पार्टी- परिचय सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्य, श्री जय प्रकाश नारायण, आचार्य नरेन्द्र देव तथा…
स्वामी प्रसाद मौर्य : महान राजनेता, प्रेरक व्यक्तित्व
– डॉ. राजबहादुर मौर्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान, बुंदेलखंड कालेज, झांसी (उ. प्र.) email id : drrajbahadurmourya @ gmail.com, website : themahamaya. Com उत्तर -प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री…
बुंदेलखंड में जनसंघ/भारतीय जनसंघ
– डॉ. राजबहादुर मौर्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, बुंदेलखंड महाविद्यालय, झांसी (उत्तर प्रदेश) परिचय उत्तर-प्रदेश के अंतर्गत आने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में झांसी, जालौन, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा तथा…